November 21, 2020

पंचायत चुनाव से पहले उलेमा कौंसिल का बड़ा दाव, 22 जिला पंचायतों के लिए घोषित किया प्रभारी

यूपी की सत्ता का सेमीफाइनल यानि पंचायत चुनाव दिलचस्प होता नजर आ रहा है। सपा, बसपा, कांग्रेस और भाजपा के बाद अब उलेमा कौंसिल ने भी पंचायत चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है। यहीं नहीं पार्टी ने तेजी दिखाते हुए 22 जिला पंचायत सीटों के लिए प्रभारी भी नियुक्त कर दिया है। जो न केवल क्षेत्र में उलेमा कौंसिल के लिए जमीन तैयार करेंगे बल्कि विजेता उम्मीवारों के चयन में भी पार्टी की मदद करेंगे।

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बता दें कि पंचायत चुनाव की अभी घोषणा नहीं हुई है लेकिन इसकी सरगर्मी तेज हो गयी है। बीजेपी ने ज्यादातर क्षेत्रों के लिए पहले ही प्रभारी नियुक्त कर दिया है।

 

वहीं सपा, बसपा और कांग्रेस भी अपने स्तर पर तैयारी में जुटी है। एआईएमआईएम पहले ही कई सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है। पार्टी के जिलाध्यक्ष कलीम जामई खुद पंचायत चुनाव में राजापुर सिकरौर सीट से किस्मत आजमा रहे है।

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अब पंचायत चुनाव को लेकर राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल ने भी अपने पत्ते खोल दिये हैं। पार्टी त्रिस्तरीय पंचायत में सभी पदों पर चुनाव लड़ने का फैसला कर चुकी है। इसी के तहत 22 जिला पंचायत सीटों पर प्रभारी की भी कर दी गयी है।

 

पार्टी के प्रवक्ता तलहा आमिर बताया कि सराय सागर मालटारी सीट के लिए मेराज खान, चांदपट्टी के लिए डा. इफ्तेखार, शमशाबाद के लिए अतीक अहमद, मकसुदिया के लिए अब्दुर्रहीम, फूलपुर के लिए मो. अमिर, मंजीरपट्टी के लिए जुलकरनैन/अशरफ, राजापुर सिकरौर के लिए मुहम्मद तारिक, राजपुर के लिए आमिर इरफान, जगदीशपुर के लिए मुशीर अहमद, हैदराबाद के लिए मो. आमिर, फरिहा के लिए आरिफ, कोटिला के लिए हाफिल अबसार, आंवक के लिए हाजी मतीउल्लाह, नंदाव के लिए जैश अंसारी, रानीपुर रजमों के लिए अली शेर, रंगडीह के लिए अबु हुरैरा, मंगरावा रायपुर के लिए मो. आरिफ, भादों के लिए नौशाद, ठेकमा के लिए जुल्फेकार अहमद, सरायमोहन के लिए मो. असलम, जोलहापुर के लिए दिलशाद अहमद को प्रभारी बनाया गया।

 

यदि देखा जाय तो सपा बसपा जिस मुस्लिम वोट बैंक के जरिये चुनाव को फतह करने की योजना बना रही है। उसी पर उलेमा कौंसिल ने दाव खेला है। पूर्व में भी मुस्लिम मतदाता उलेमा कौंसिल के साथ खुलकर खड़े हुए है। पिछले पंचायत चुनाव में पार्टी ने अपने दम पर आधा दर्जन सीटों पर कब्जा किया था तो कई सीटों पर वह रनर थी। एक बार फिर उलेमा कौंसिल ने सपा बसपा से पहले बड़ा दाव चल दिया है। इससे दोनों दलों टेंशन बढ़ना लाजमी है।

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