बिहार के लाल आशुतोष को प्रयागराज में आयोजित ‘स्मार्ट युवा फिल्म फेस्टिवल’ में किया गया सम्मानित

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बेतिया/बिहार : मझौलिया, पश्चिम चम्पारण के महनवा गांव निवासी इलाहाबाद विश्वविद्यालय में स्नातक तृतीय वर्ष के छात्र आशुतोष राज ने जिला सहित पूरे राज्य का मान बढ़ाया है। स्मार्ट युवा फिल्म फेस्टिवल के अवसर पर आशुतोष राज को उत्कृष्ट कार्य करने के लिए जिलाधिकारी कार्यालय, प्रयागराज (यूपी) के संगम सभागार में 29 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित किया गया।

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यूनिसेफ, राष्ट्रीय सेवा योजना और उत्तर प्रदेश सरकार के तत्वधान में स्मार्ट युवा फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रयागराज रेंज के आईजी डॉ. राकेश सिंह, विशेष्ट अतिथि के रूप में प्रयागराज के जिलाधिकारी संजय कुमार खत्री, साथ ही प्रयागराज के एसएसपी शैलेश कुमार पाण्डेय उपस्थित थे।

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स्मार्ट युवा कार्यक्रम का आरंभ मार्च में उत्तर प्रदेश के तीन अलग – अलग शहरों, प्रयागराज, लखनऊ और कानपुर में किया गया था। जिसके अंतर्गत इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राष्ट्रीय सेवा योजना के 25 स्वयंसेवकों को एन.एस.एस. मेंटर के रूप में चुना गया था। तत्पश्चत्य इन मेंटर्स को प्रयागराज के 5 अलग अलग मालिन बस्तियों में भेज गया जहां कोरोना महामारी के कारण लोग अपने जीवन यापन के लिए संघर्ष कर रहे थे।

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इन मेंटर्स को शिक्षा, बाल संरक्षण और कोविड 19, इन तीन अलग अलग विषयों पर ऐसी प्रेरक कहानियों को खोजना था जिससे उस बस्ती तथा समाज के लोगों के जीवन में बड़ा बदलवा आया हो। कहानियों को खोजने के पश्चात उनका फिल्मांकन करना था जिसे यूनिसेफ और राष्ट्रीय सेवा योजना के द्वारा विभिन्न सोशल मीडिया तथा फिल्म फेस्टिवल में दिखाया जा सकें और लोगों को प्रेरित किया जा सकें। 6 महीनों में कुल 77 फिल्मे बनी। जिसमें से 13 फिल्मों को स्मार्ट युवा फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया।

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इसी स्मार्ट युवा फिल्म फेस्टिवल के अवसर पर आशुतोष राज को उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रयागराज रेंज के आईजी डॉ राकेश सिंह तथा एसएसपी श्री शैलेश कुमार पाण्डेय के द्वारा प्रमाण पत्र तथा मोमेंटो देकर पुरस्कृत किया गया।

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इस संबंध में आशुतोष ने बताया ‘मुझे प्रसन्नता हैं कि इस कार्यक्रम में मुझे विश्वविधालय का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त हुआ। पुरस्कार प्राप्ति से हर्ष की अनुभूति हो रही हैं। साथ ही यह स्मरण भी हैं कि यह कारवां यही ना खत्म हो। हम अपने स्तर से लगातार ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करने रहें जिससे की मलिन बस्तियों में रह रहे लोगों के जीवन में बदलाव आए तथा ऐसे लोगों के कहानियों को समाज का दूसरा तबका भी जानें और इनका सहयोग करें। हमें मलिन बस्तियों में रह रहे लोगों के प्रति अपने कर्त्तव्य बोध को वृहद स्तर पर जगाने की आवश्यकता हैं जिससे इनके जीवन में वास्तविक बदलाव आ सकें।’

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